तिलखन में चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा

रीवा क्षेत्र अंतर्गत कीरत निकेतन ग्राम तिलखन में चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा में मां ज्वाला धाम शक्तिपी?

रीवा क्षेत्र अंतर्गत कीरत निकेतन ग्राम तिलखन में चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा सम्मिलित हुए मां ज्वाला धाम शक्तिपीठ उचेहरा के संस्थापक प्रधान पुजारी
धर्म समाज: भागवत कथा में कंस वध, संवाद और रुक्मणी विवाह की कथा के प्रसंग सुनाए*

नौरोजाबाद थाने में पदस्थ आदरणीय टी, आई, श्री ज्ञानेन्द्र सिंह बघेल जी के निज निवास पर चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत*#
नौरोजाबाद रीवा जिले के ग्राम तिलखन में संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा व्यास पीठ पर विराजमान परम् पूज्य प्रदीप कृष्ण शास्त्री जी महराज वृंदावन कथावावाचक जी ने कंस वध संवाद रुक्मणी विवाह की कथा रोचक प्रसंग सुनाए,
उन्होंने कहा कि गोपियों की कृष्ण भक्ति से उद्धव इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने गोपियों की चरण रज की बंदना की तथा इच्छा प्रकट करते हुए कहा कि अगले जन्म में गोपियों की चरण रज से पवित्र, वृंदावन की लता, औषधि, झाड़ी, आदि वन्य प्राणी इस प्रकार कृष्ण के प्रति ब्रज वासियों के पेन की सराहना करते हुए तथा नंदादि गोप तथा गोपियों से कृष्ण के लिए अनेक है लेकर हुए मथुरा लौट आए।
वही रुकमणी विवाह प्रसंग के दौरान कथा स्थल पर की सभी रश्मि भजनों के माध्यम से एवं झांकी प्रस्तुत कर कथा विस्तार रूप से बतलाई गई । वही उमरिया जिले व रीवा जिले के , सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने श्रीमद् भागवत कथा का रसास्वादन कर सभी श्रद्धालुओं ने आनंद लिया।
महिलाओं श्रद्धालुओं ने मंगल गीत गाए, और जय जय श्री राधे पवित्र उद घोष किया, वचनों में पं आचार्य जी ने कहा कि रुकमणी साक्षात लक्ष्मी का अवतार थी वह मन ही मन श्री कृष्ण से विवाह करना चाहती थी, उधर श्री कृष्ण भी जानते थे कि रुकमणी में कई गुण हैं। लेकिन रुक्मणी का भाई रुक्मी श्री कृष्ण से शत्रुता रखता था।
अंततः श्री कृष्ण नए रुकमणी ने रुक्मी को युद्ध में परास्त करके रुक्मणी से विवाह किया। कथा के टी आई साहब व उनके दोनो भ्राता जी उनकी माता जी ने कथा की आरती उतारी। प्रसाद वितरण के साथ कथा का समापन हुआ। बहुत सुंदर कथा प्रसंग थी व श्रोतागण बहुत सुंदर व्यवस्था के साथ भगवान श्री कृष्ण के विवाह में बाराती घराती बनकर नाचे झूमे व पडाका से आकाश का सुंदर नजारा दिखाई दे रहा था मां ज्वाला जी के संस्थापक प्रधान पुजारी जी पूरी कथा का श्रवण कर कार्यकर्म की सराहना की।
जय श्री राधे कृष्णा जी ।


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